Saturday, June 20, 2020

बोरज तँवरान (सलूम्बर) के तंवरो का ऐतिहासिक विवरण

बोरज तँवरान (सलूम्बर) के तँवरो का ऐतिहासिक विवरण

  • ठा.गुलजी तंवर(गुलाबसिंह)- रावत भीमसिंह कालीन एक पट्टा  व  दो ताम्र पत्र प्राप्त होते है ,एक पट्टा तँवर गुलजी के नाम का संवत 1855 आषढ सूद तीज सोमवार (16 जुलाई 1798) का है, यह पट्टा रावत भीमसिंह की और से उसके पूर्वज के बलिदान पर मिला। जब सलूम्बर को लूटने के लिए मराठा सरदार होलकर की सेना चढ़ आई थी, तब तंवर खानदान के राजपूतो की टुकड़ी को उन्हें रोकने के लिए भेजा ,जिसमे तंवर राजपूत लड़ते हुए काम आये, इन तंवर ठाकुरो के देवल सलूम्बर तालाब के पास रेट में बने हुए है।
     उनके इस शोर्यपूर्ण कार्य का मूल्यांकन रावत ने इस तरह किया की जितनी दुरी तक युद्ध में गोडे दोड़े ,उतने क्षेत्रफल के गाँव उन्हें इनाम के तोर पर जागीर में दिए गए। इस प्रकार रावत भीमसिंह ने अपने इन तंवर सरदार के वंशज गुलजी तंवर को तीन गाँव (रेट, हांड़ी ,डईला ,रेबारियोवाली मउडी की जागीर दी ,इस युद्ध में तंवर ठकुराइन सती हुई थी, जिनका स्थान तंवर पोल(सलूम्बर) के पास है।
  • ठा.रघुनाथसिंह तंवर- संवत् 1857 मगसा विद 14 मंगलवार (13 जनवरी 1801) मे ठाकुर रघुनाथसिंह को सलुम्बर के रावत भवानी सिंह ने दादरा(गांवडा) गांव की जागीर प्रदान की।
  • ठा.भीम सिंह तंवर-एक पट्टा(ताम्र पत्र) संवत् 1882 आसोज सुद सप्तमी मंगलवार (18 अक्टूबर 1825) के दिन का है जिसमे मुण्डकटी* के बदले मे सलूम्बर के रावत पदमसिंह ने सरदार भीमसिंह तंवर को जागीर में केलाई गांव दिया जाने का जिक्र है सरदार को इसके साथ भोग, मांगणा आदि कर लेने के अधिकार दिये गये एवं पट्टे में निर्देश दिए गए कि इस जागीर के एवज मे सरदार आदेश की पालना करे व घोड़ा रखे। *मुण्डकटी का तात्पर्य फौज मे काम आने वाले जागीरदारो को उनके बलिदान के बदले उनके वंशजो को जागीरे दी जाती थी।
  • ठा.राय सिंह तंवर- संवत् 1925 माघ विद 5 शनिवार (02 जनवरी 1869) को इन्हे गांवडा, सरवड़ी और वेण की जागीर मिली, इनके दो पुत्र हुए-
    • ठा.दलेलसिंह तंवर- रावत जोधसिंह द्वितीय (1862-1901) द्वारा दलेलसिंह तंवर को गांवडा, सरवड़ी, वेण तीनो गांवो के बदले मे गिर्वा तहसील के अर्न्तगत साठपुर गांव की जागीर सवंत 1939 कार्तिक सूद चौथ मंगलवार (14 नवंबर 1882)  के दिन दी गई, ठाकुर दलेलसिंह तंवर को भोग, वराड लेने के अधिकार दिए गये, घोडे रखने व घोडे सहित वक्त जरूरत नौकरी पर आने के आदेश दिये गये। 
    • ठा.तेजसिंह तंवर- रावत जोधसिंह द्वितीय (1862-1901) द्वारा गांव बोरज तँवरान का पट्टा भोग , मागणा सहित तेज सिंह तँवर नामक सरदार को जागीर में संवत 1933 पौष विद 13 बुधवार (13 दिसंबर 1876) के दिन दिया गया, इसमें घोड़े रखने, घोडे सहित वक्त जरूरत नौकरी पर आने के आदेश दिए गए, यह सरदार ठाकुर राय सिंह तंवर का पुत्र था जिसकी जागीर में तीन गाँव गांवडा, सरवडी और वेण थे

संदर्भ

  1. विमला भंडारी, सलूम्बर का इतिहास,P-191,321,366
  2. ठिकाना कालीन जागीरी के पट्टे
  3. ठा.अर्जुनसिहजी तंवर से प्राप्त पुराने दस्तावेज़

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