Friday, March 19, 2021

दिल्ली के सम्राट अनंगपाल द्वितीय से रामदेवरा के वर्तमान गद्दीपती तक की वंशावली

"दिल्ली के सम्राट अनंगपाल द्वितीय से रामदेवरा के वर्तमान गद्दीपती भोमसिंह जी तंवर तक की वंशावली "

  1. अनगपाल द्वितीय (1051-1081)-लालकोट का निर्माण करवाया और लोह स्तंभ की स्थापना की, अनंगपाल द्वितीय ने 27 महल और मन्दिर बनवाये थे।दिल्ली सम्राट अनगपाल द्वितीय ने तुर्क इबराहीम को पराजित किया,इनके 2 पुत्र राजस्थान में आकर बस गए राव सलून जी(सालूवाहन)-इनके वंशज वर्तमान में पाटन-तंवरावाटी में निवास करते हैं ,राव आमजी(अमलजी)- इनके वंशज रामदेवरा(पोखरण) में निवास करते हैं 
  2. राणा आमजी(अमलजी)- राजस्थान मे आकर बस गए 
  3. राणा अखेराज जी
  4. राणा भीवराज जी
  5. राणा जोगराज जी
  6. राणा रणसी जी- नरेणा (अजमेर) के राजा
  7. राणा अजमल जी- ऊडू काश्मीर और पोखरण 
  8. राव रामदेव जी- राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता 
  9. राव देवराज जी
  10. राव रतन सिंह जी
  11. गद्दीपती राव साहब गोविंदराज सिंह जी
  12. गद्दीपती राव साहब देवकरण जी
  13. गद्दीपती राव साहब पृथ्वीराज जी
  14. गद्दीपती राव साहब राणो जी
  15. गद्दीपती राव साहब मांडण जी
  16. गद्दीपती राव साहब भूपत सिंह जी
  17. गद्दीपती राव साहब रघुनाथसिंह जी
  18. गद्दीपती राव साहब मान सिंह जी
  19. गद्दीपती राव साहब अजब सिंह जी
  20. गद्दीपती राव साहब किशोरसिंह जी
  21. गद्दीपती राव साहब सवाई सिंह जी
  22. गद्दीपती राव साहब चैन सिंह जी
  23. गद्दीपती राव साहब राम सिंह जी
  24. गद्दीपती राव साहब बलिदान सिंह जी
  25. गद्दीपती राव साहब हिम्मत सिंह जी
  26. गद्दीपती राव साहब गज सिंह जी
  27. गद्दीपती राव साहब रिडमल सिंह जी
  28. गद्दीपती राव साहब जसवंत सिंह जी
  29. गद्दीपती राव साहब भोम सिंह जी (वर्तमान गद्दीपती राव साहब)

दिल्ली के तंवर/तोमर राजवंश की वंशावली

  1. अनंगपाल प्रथम – दिल्ली राज्य के संस्थापक राजा थे, इतिहास में इनके अनेक नाम मिलते है जेसे बीलनदेव, जाऊल इत्यादि, दिल्ली मे अनंगपुर गाँव बसाया और अनंगपुर तालाब का निर्माण करवाया 
  2. राजा वासुदेव (754-773)
  3. राजा गंगदेव (773-794)
  4. राजा पृथ्वीमल (794-814)-बंगाल के राजा धर्म पाल के साथ युद्ध
  5. जयदेव (814-834)
  6. राजा नरपाल (834-849)
  7. राजा उदयपाल (849-875)
  8. राजा आपृच्छदेव (875-897)
  9. राजा पीपलराजदेव (897-919)
  10. राज रघुपाल (919-940)
  11. राजा तिल्हणपाल (940-961)
  12. राजा गोपाल देव (961-979)-इनके समय साम्भर के राजा सिहराज और लवणखेडा के तोमर सामंत सलवण के मध्य युद्ध हुआ जिसमें सलवण मारा गया तथा उसके पश्चात दिल्ली के राजा गोपाल देव ने सिंहराज पर आक्रमण करके उन्हें युद्ध में मारा
  13. सुलक्षणपाल तोमर (979-1005)-महमूद के साथ युद्ध किया
  14. जयपालदेव (1005-1021)-महमूद के साथ युद्ध किया, महमूद ने थानेश्वसर ओर मथुरा को लूटा
  15. कुमारपाल (1021-1051)-मसऊद के साथ युद्ध किया और 1038 में हाँसी के गढ का पतन हुआ, पाच वर्ष बाद कुमारपाल ने हासी, थानेश्वसर के साथ साथ कांगडा भी जीत लिया
  16. अनगपाल द्वितीय (1051-1081)-लालकोट का निर्माण करवाया और लोह स्तंभ की स्थापना की, अनंगपाल द्वितीय ने 27 महल और मन्दिर बनवाये थे।दिल्ली सम्राट अनगपाल द्वितीय ने तुर्क इबराहीम को पराजित किया,इनके 2 पुत्र राजस्थान में आकर बस गए राव सलून जी(सालूवाहन)-इनके वंशज वर्तमान में पाटन-तंवरावाटी में निवास करते हैं ,राव आमजी(अमलजी)- इनके वंशज रामदेवरा(पोखरण) में निवास करते हैं 
  17. तेजपाल प्रथम(1081-1105)
  18. महिपाल(1105-1130)-महिलापुर बसाया और शिव मंदिर का निर्माण करवाया
  19. विजयपाल (1130-1151)-मथुरा में केशवदेव का मंदिर
  20. मदनपाल(1151-1167)-मदनपाल ने विग्रहराज के साथ मिलकर मल्लेच्छो की बाढ को रोका, मदलपाल विग्रहराज के शोर्य से प्रभावित होकर अपनी पुत्री देसलदेवी का विवाह किया (नाकि कीसी काल्पनिक अनगपाल तृतीय ने सोमेश्वर से)
  21. पृथ्वीराज तोमर (1167-1189)-अजमेर के राजा सोमेश्वर और पृथ्वीराज चव्हाण इनके समकालीन थे
  22. चाहाडपाल/गोविंदराज (1189-1192)-पृथ्वीराज चौहान के साथ मिलकर गोरी के साथ युद्ध किया,तराईन दुसरे युद्ध मे मारा गया
  23. तेजपाल द्वितीय (1192-1193 ई)-दिल्ली का अन्तिम तोमर राजा , जिन्होंने स्वतन्त्र 15 दिन तक शासन किया, और कुतुबुद्दीन ने दिल्ली पर आक्रमण कर हमेसा के लिए दिल्ली पर कब्जा कर लिया। 

तंवर राजवंश की पांडववीर अर्जुन से दिल्ली के अंतिम शासक तक वंशावली

राजपुत तंवर वंश की पांडववीर अर्जुन से अंतिम दिल्लीपति महाराजा तेजपाल द्वितीय (1192-1193 ई) तक वंशावली :-


1. अर्जुन

2. अभिमन्यु

3. परिक्षत

4. जनमेजय

5. अश्वमेघ

6. दलीप

7. छत्रपाल

8. चित्ररथ

9. पुष्टशल्य

10. उग्रसेन

11. कुमारसेन

12. भवनति

13. रणजीत

14. ऋषिक

15. सुखदेव

16.नरहरिदेव

17. सूचीरथ

18. शूरसेन

19. दलीप द्वितीय

20. पर्वतसेन

21. सोमवीर

22. मेघाता

23. भीमदेव

24. नरहरिदेव द्वितीय

25. पूर्णमल

26. कर्दबीन

27. आपभीक

28. उदयपाल

29. युदनपाल

30. दयातराज

31. भीमपाल

32. क्षेमक - इन्द्रप्रस्थ का अंतिम राजा, महावीर जैन के समकालीन 

33. अनक्षामी

34. पुरसेन

35. बिसरवा

36. प्रेमसेन

37. सजरा

38. अभयपाल

39. वीरसाल

40. अमरचुड़

41. हरिजीवि

42. अजीतपाल

43. सर्पदन

44. वीरसेन

45. महेशदत्त

46. महानिम

47. समुद्रसेन

48. शत्रुपाल

49. धर्मध्वज

50. तेजपाल

51. वालिपाल

52. सहायपाल

53. देवपाल

54. गोविन्दपाल

55. हरिपाल

56. गोविन्दपाल द्वितीय

57. नरसिंह पाल

58. अमृतपाल

59. प्रेमपाल

60. हरिश्चंद्र

61. महेंद्रपाल

62. छत्रपाल

63. कल्याणसेन

64. केशवसेन

65. गोपालसेन

66. महाबाहु

67. भद्रसेन

68. सोमचंद्र

69. रघुपाल

70. नारायण

71. भनुपाद

72. पदमपाद

73. दामोदरसेन

74. चतरशाल

75. महेशपाल

76. ब्रजागसेन

77. अभयपाल

78. मनोहरदास

79. सुखराज

80. तंगराज

81. तुंगपाल – इनके नाम से इनके वंशज तोमर या तंवर राजपूत कहलाते हैं।

82. अनंगपाल तंवर (तोमर) – दिल्ली राज्य के संस्थापक, इस वंशावली से पता चलता है कि अनंगपाल तंवर और तंवर(तोमर) वंश चंद्रवंशी क्षत्रिय हैं, और इनका संबंध पाण्डु-पुत्र-अर्जुन से जुड़ता हैं।

83.राजा वासुदेव (754-773)

84.राजा गंगदेव (773-794)

85.राजा पृथ्वीमल (794-814)-बंगाल के राजा धर्म पाल के साथ युद्ध

86.जयदेव (814-834)

87.राजा नरपाल (834-849)

88.राजा उदयपाल (849-875)

89.राजा आपृच्छदेव (875-897)

90.राजा पीपलराजदेव (897-919)

91.राज रघुपाल (919-940)

92.राजा तिल्हणपाल (940-961)

93.राजा गोपाल देव (961-979)-इनके समय साम्भर के राजा सिहराज और लवणखेडा के तोमर सामंत सलवण के मध्य युद्ध हुआ जिसमें सलवण मारा गया तथा उसके पश्चात दिल्ली के राजा गोपाल देव ने सिंहराज पर आक्रमण करके उन्हें युद्ध में मारा

94.सुलक्षणपाल तोमर (979-1005)-महमूद के साथ युद्ध किया

95.जयपालदेव (1005-1021)-महमूद के साथ युद्ध किया, महमूद ने थानेश्वसर ओर मथुरा को लूटा

96.कुमारपाल (1021-1051)-मसऊद के साथ युद्ध किया और 1038 में हाँसी के गढ का पतन हुआ, पाच वर्ष बाद कुमारपाल ने हासी, थानेश्वसर के साथ साथ कांगडा भी जीत लिया

97.अनगपाल द्वितीय (1051-1081)-अनगपाल द्वितीय (1051-1081)-लालकोट का निर्माण करवाया और लोह स्तंभ की स्थापना की, अनंगपाल द्वितीय ने 27 महल और मन्दिर बनवाये थे।दिल्ली सम्राट अनगपाल द्वितीय ने तुर्क इबराहीम को पराजित किया,इनके 2 पुत्र राजस्थान में आकर बस गए राव सलून जी(सालूवाहन)-इनके वंशज वर्तमान में पाटन-तंवरावाटी में निवास करते हैं ,राव आमजी(अमलजी)- इनके वंशज रामदेवरा(पोखरण) में निवास करते हैं 

98.तेजपाल प्रथम(1081-1105)

99.महिपाल(1105-1130)-महिलापुर बसाया और शिव मंदिर का निर्माण करवाया

100.विजयपाल (1130-1151)-मथुरा में केशवदेव का मंदिर

101.मदनपाल(1151-1167)-मदनपाल ने विग्रहराज के साथ मिलकर मल्लेच्छो की बाढ को रोका, मदलपाल विग्रहराज के शोर्य से प्रभावित होकर अपनी पुत्री देसलदेवी का विवाह किया (नाकि कीसी काल्पनिक अनगपाल तृतीय ने सोमेश्वर से)

102.पृथ्वीराज तोमर(1167-1189)-अजमेर के राजा सोमेश्वर और पृथ्वीराज चव्हाण इनके समकालीन थे

103.चाहाडपाल/गोविंदराज (1189-1192)-पृथ्वीराज चौहान के साथ मिलकर गोरी के साथ युद्ध किया,तराईन दुसरे युद्ध मे मारा गया

104.तेजपाल द्वितीय (1192-1193 ई)-दिल्ली का अन्तिम तोमर राजा , जिन्होंने स्वतन्त्र 15 दिन तक शासन किया, और कुतुबुद्दीन ने दिल्ली पर आक्रमण कर हमेसा के लिए दिल्ली पर कब्जा कर लिया। 

Saturday, June 20, 2020

बोरज तँवरान (सलूम्बर) के तंवरो का ऐतिहासिक विवरण

बोरज तँवरान (सलूम्बर) के तँवरो का ऐतिहासिक विवरण

  • ठा.गुलजी तंवर(गुलाबसिंह)- रावत भीमसिंह कालीन एक पट्टा  व  दो ताम्र पत्र प्राप्त होते है ,एक पट्टा तँवर गुलजी के नाम का संवत 1855 आषढ सूद तीज सोमवार (16 जुलाई 1798) का है, यह पट्टा रावत भीमसिंह की और से उसके पूर्वज के बलिदान पर मिला। जब सलूम्बर को लूटने के लिए मराठा सरदार होलकर की सेना चढ़ आई थी, तब तंवर खानदान के राजपूतो की टुकड़ी को उन्हें रोकने के लिए भेजा ,जिसमे तंवर राजपूत लड़ते हुए काम आये, इन तंवर ठाकुरो के देवल सलूम्बर तालाब के पास रेट में बने हुए है।
     उनके इस शोर्यपूर्ण कार्य का मूल्यांकन रावत ने इस तरह किया की जितनी दुरी तक युद्ध में गोडे दोड़े ,उतने क्षेत्रफल के गाँव उन्हें इनाम के तोर पर जागीर में दिए गए। इस प्रकार रावत भीमसिंह ने अपने इन तंवर सरदार के वंशज गुलजी तंवर को तीन गाँव (रेट, हांड़ी ,डईला ,रेबारियोवाली मउडी की जागीर दी ,इस युद्ध में तंवर ठकुराइन सती हुई थी, जिनका स्थान तंवर पोल(सलूम्बर) के पास है।
  • ठा.रघुनाथसिंह तंवर- संवत् 1857 मगसा विद 14 मंगलवार (13 जनवरी 1801) मे ठाकुर रघुनाथसिंह को सलुम्बर के रावत भवानी सिंह ने दादरा(गांवडा) गांव की जागीर प्रदान की।
  • ठा.भीम सिंह तंवर-एक पट्टा(ताम्र पत्र) संवत् 1882 आसोज सुद सप्तमी मंगलवार (18 अक्टूबर 1825) के दिन का है जिसमे मुण्डकटी* के बदले मे सलूम्बर के रावत पदमसिंह ने सरदार भीमसिंह तंवर को जागीर में केलाई गांव दिया जाने का जिक्र है सरदार को इसके साथ भोग, मांगणा आदि कर लेने के अधिकार दिये गये एवं पट्टे में निर्देश दिए गए कि इस जागीर के एवज मे सरदार आदेश की पालना करे व घोड़ा रखे। *मुण्डकटी का तात्पर्य फौज मे काम आने वाले जागीरदारो को उनके बलिदान के बदले उनके वंशजो को जागीरे दी जाती थी।
  • ठा.राय सिंह तंवर- संवत् 1925 माघ विद 5 शनिवार (02 जनवरी 1869) को इन्हे गांवडा, सरवड़ी और वेण की जागीर मिली, इनके दो पुत्र हुए-
    • ठा.दलेलसिंह तंवर- रावत जोधसिंह द्वितीय (1862-1901) द्वारा दलेलसिंह तंवर को गांवडा, सरवड़ी, वेण तीनो गांवो के बदले मे गिर्वा तहसील के अर्न्तगत साठपुर गांव की जागीर सवंत 1939 कार्तिक सूद चौथ मंगलवार (14 नवंबर 1882)  के दिन दी गई, ठाकुर दलेलसिंह तंवर को भोग, वराड लेने के अधिकार दिए गये, घोडे रखने व घोडे सहित वक्त जरूरत नौकरी पर आने के आदेश दिये गये। 
    • ठा.तेजसिंह तंवर- रावत जोधसिंह द्वितीय (1862-1901) द्वारा गांव बोरज तँवरान का पट्टा भोग , मागणा सहित तेज सिंह तँवर नामक सरदार को जागीर में संवत 1933 पौष विद 13 बुधवार (13 दिसंबर 1876) के दिन दिया गया, इसमें घोड़े रखने, घोडे सहित वक्त जरूरत नौकरी पर आने के आदेश दिए गए, यह सरदार ठाकुर राय सिंह तंवर का पुत्र था जिसकी जागीर में तीन गाँव गांवडा, सरवडी और वेण थे

संदर्भ

  1. विमला भंडारी, सलूम्बर का इतिहास,P-191,321,366
  2. ठिकाना कालीन जागीरी के पट्टे
  3. ठा.अर्जुनसिहजी तंवर से प्राप्त पुराने दस्तावेज़

Friday, June 12, 2020

बांसवाड़ा में तंवरो का ऐतिहासिक विवरण

बांसवाड़ा में तंवरो का ऐतिहासिक विवरण

  • राणी अनुपकुंवर तंवरजी-सरवाणिया गांव का संवत 1724 श्रावण सुदि 15 (25जुलाई सन् 1667ई.) का एक दानपत्र मिलता है जिसमें बांसवाड़ा के महारावल कुशलसिंह कि राणी अनुपकुंवर तंवरजी द्वारा चन्द्रग्रहण के अवसर पर सरवाणिया गांव में भूमि दान करने का विवरण मिलता है।
  • नाहरसिंह तंवर-सन् 1817(सवंत 1873) वेशाख सुद 12 दने तंवर नाहरसिंह, बांसवाड़ा महारावल उम्मेदसिंह कि तरफ से नवाब करमखां(पिंडारी) की फौज से लड़ते हुए काम आने का विवरण मिलता है।
  • बहादुरसिंह तंवर-बासंवाडा के सुरपुर गांव में 5 दिसम्बर 1820(संवत 1877 कार्तिक वदि 14) का स्मारक लेख मिलता है, जिसमें तंवर बहादुरसिंह का मदथला नामक पहाड़ पर लड़ते हुए काम आने का विवरण मिलता है।
                                              🙏करणसिंह बोरज तँवरान🙏

संदर्भ- गोरीशंकर ओजा, बांसवाड़ा राज्य का इतिहास, पेज-109,149,166

पृथ्वीराज तोमर(Prathviraj Tomar)

पृथ्वीराज तोमर पृथ्वीराज तोमर (1167-1189 ई.) दिल्ली का तोमर शासक था। पृथ्वीराज तोमर अजमेर के राजा सोमेश्वर और पृथ्वीराज चौहान के समकालीन राज...